डिसेंट्रलाइज फाइनेंस (Defi) क्या है? जिसे भविष्य का फाइनेंस कहा जा रहा है

आज के इस युग में हर टेक्नोलॉजी को डिसेंट्रलाइज किया जा रहा है इसके लिए ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है जैसे क्रिप्टोकरंसी जो करेंसी के बदले में एक डिसेंट्रलाइज सिस्टम का निर्माण कर रही है वैसे ही इंटरनेट में वेब 3.0, NFT, Metaverse आदि। हम इस लेख के जरिए समझे कि फाइनेंस मे डिसेंट्रलाइज सिस्टम किस तरह काम करती हैं और Defi क्या है? Finance 2.0 क्या है? इसके लिए हमें आज के फाइनेंस सिस्टम सेंट्रलाइज फाइनेंस को भी समझना होगा

सेंट्रलाइज फाइनेंस क्या है? | What is Centralize Finance?

हमारा ट्रेडिशनल फाइनेंस सिस्टम आमतौर पर जो हम यूज करते हैं वह सेंट्रलाइज फाइनेंस सिस्टम है जिसे हम फिक्स डिपाजिट (FD) और लॉन वगैरा लेने में इस्तेमाल करते हैं जैसे यदि किसी व्यक्ति के पास पैसे अधिक हैं और वह अपना पैसे बैंक में जमा करना है तो बैंक उस पैसे के बदले कुछ समय बाद महीना व सलाना ब्याज (इंटरेस्ट) देता है जैसे एलआईसी और फिक्स्ड डिपॉजिट में हम पैसे जमा करते हैं ताकि बाद में हमें जायदा रिटर्न मिले। और यदि किसी व्यक्ति को पैसे की जरूरत है तो वह व्यक्ति बैंक में अपना कुछ सामान गिरवी रख कर पैसे ले सकता है और उसे बाद में ब्याज के साथ बैंक को चुकाना पड़ेगा। इसमें बैंक एक मिडिल ट्रस्ट की तरह काम करती है यही मिडिलमैन एक सेंट्रलाइज सिस्टम का निर्माण करती हैं।

डिसेंट्रलाइज फाइनेंस क्या है? | what is Defi?

डिसेंट्रलाइज फाइनेंस में कोई भी मिडिल अथॉरिटी नहीं होता है जैसे बैंक या फिर फाइनेंशियल इंस्टिट्यूट नहीं होता है यह एक स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट के तहत काम करता है स्मार्ट कांटेक्ट में बस कुछ नियम लिखे होते हैं। और यह ब्लॉकचेन पर आधारित सिस्टम है इसमें पैसे के बदले क्रिप्टो का यूज़ होता है आज कई क्रिप्टो मार्केट में है जैसे यदि आपके पास बिटकॉइन है। और आपको NFT या Metaverse मे कुछ खरीदने के लिए दूसरे क्रिप्टो की जरूरत है लेकिन आप बिटकॉइन को खोना नहीं चाहते हैं तो बिटकॉइन को गिरवी रख कर आप दूसरे कोई क्रिप्टो कॉइन जैसे एथेरियम, USDT ले सकते हैं और बाद में आपके जरूरत पूरी होने के बाद अपने गिरवी बिटकॉइन को वापस ले सकते हैं इसमें भी आपको कुछ इंटरेस्ट देना पड़ता है।
और यदि आपके पास कोई क्रिप्टो बहुत अधिक मात्रा में है तो आप इसे डिसेंट्रलाइज फाइनेंस के स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट में जमा कर सकते हैं और इससे बदले आपको बयाज भी मिलेगा।

सेंट्रलाइज फाइनेंस और डिसेंट्रलाइज फाइनेंस में क्या अंतर है?

सेंट्रलाइज फाइनेंस में यदि आप अपना पैसा किसी बैंक में जमा करते हैं और आपका बैंक उसे किस तरह से इस्तेमाल करेगा यह आप नहीं जान सकते सेंट्रलाइज फाइनेंस के सर्विस लेने के लिए आपको डॉक्यूमेंटेशन में केवाईसी कराना जरूरी होता है सेंट्रलाइज फाइनेंस में आप अपने देश के फाइनेंस सिस्टम का ही इस्तेमाल कर सकते हैं जैसे कोई भी भारत का व्यक्ति किसी दूसरे देश का फाइनेंस सिस्टम का इस्तेमाल नहीं कर सकता है। इसमें बैंक की मर्जी होती है कि वह अपना सर्विस किसे देना चाहता है और किसे नहीं देना चाहते हैं।
वही डिसेंट्रलाइज फाइनेंस में किसी भी तरह का डॉक्यूमेंट की जरूरत नहीं होती है।
इसमें आप अपने क्रिप्टो का ट्रेक रिकॉर्ड देख सकते हैं कि वह कब और कहां पर इस्तेमाल किया जा रहा है यह एक ग्लोबल सर्विस है आप इसे दुनिया के किसी भी कोने से इस्तेमाल कर सकते हैं यह किसी व्यक्ति के लिए रिस्ट्रिक्टेड नहीं है। इसमें ट्रांसपेरेंसी बहुत अधिक है इसमें कोई सेंसरशिप नहीं होता है इसमें उधार के अलावा Defi पेमेंट, Defi एक्सचेंज व Defi एसेट्स जैसे कई प्रोटोकॉल के सर्विस मे इस्तेमाल किए जाते हैं इसीलिए डिसेंट्रलाइज फाइनेंस को फाइनेंस 2.0 तथा भविष्य का फाइनेंस सिस्टम भी कहा जाता है।

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